यह कृति क़ुरआन मजीद का हिन्दी अनुवाद एवं भावार्थात्मक प्रस्तुति है।
यह स्पष्ट रूप से समझा जाना चाहिए कि क़ुरआन का मूल और वास्तविक पाठ केवल अरबी भाषा में है।
पाठकों को ज्ञात रहे कि —
क़ुरआन मजीद का मूल, वास्तविक एवं पूर्ण पाठ केवल अरबी भाषा में है, और वही अल्लाह के अक्षरशः शब्द हैं। कोई भी अनुवाद, व्याख्या या भावार्थ— चाहे वह किसी भी भाषा में हो, यहाँ तक कि अरबी भाषा में किया गया भावार्थ ही क्यों न हो—क़ुरआन के मूल पाठ एवं उसकी भाषा के समकक्ष या समान नहीं हो सकता।
किसी भी अन्य भाषा में प्रस्तुत अनुवाद, संदर्भ या भावार्थ का उद्देश्य मूल पाठ की शब्द समीपता के प्रयास या अर्थ-समीपता तक पहुँचना होता है, न कि उसके स्थान पर खड़ा होना। प्रत्येक अनुवाद मानवीय समझ और सीमाओं के अधीन एक प्रयास मात्र होता है। प्रस्तुत हिन्दी अनुवाद भी क़ुरआन के संदेश को समझने में सहायक बनने का एक साधन है, स्वयं क़ुरआन नहीं। यदि इस अनुवाद या भावार्थ में कोई त्रुटि, अपूर्णता या असंगति पाई जाती है, तो वह अनुवादकर्ता की समझ का परिणाम है; क़ुरआन मजीद स्वयं किसी भी त्रुटि से पूर्णतः मुक्त है।
प्रस्तुत हिन्दी अनुवाद में क़ुरआन के संदेश, भाव और अर्थ को शब्द समीप रहते हुए सरल और सटीक अर्थ के साथ अनुवाद करने का प्रयास किया गया है। अनुवाद की प्रकृति के कारण कुछ शब्दों, वाक्यों या भावों की व्याख्या में विद्वानों के बीच मतभेद संभव है। अतः यह अनुवाद एक मानवीय प्रयास है, जो समझ और अध्ययन के लिए है, न कि अंतिम या एकमात्र प्रामाणिक व्याख्या। पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक, विधिक या आस्था-सम्बन्धी निर्णय के लिए मूल अरबी क़ुरआन एवं प्रमाणिक तफ़सीरों की ओर अवश्य संदर्भ लें।
यदि इस अनुवाद में कोई त्रुटि या कमी पाई जाती है, तो वह अनुवादकर्ता की समझ का परिणाम है; क़ुरआन मजीद उससे पूर्णतः मुक्त और पवित्र है।
यह परियोजना क़ुरआन मजीद के संदेश को शुद्ध + सरल, सटीक एवं संतुलित हिन्दी भाषा में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। :-इस अनुवाद में विशेष रूप से यह ध्यान रखा गया है कि:
- क़ुरआन की भाषिक गरिमा और गंभीरता बनी रहे
- अनुवाद अत्यधिक कठिन न हो, और न ही अत्यधिक सरलीकृत
- शब्दों का चयन आस्था-सम्मत, संदर्भ-संगत एवं भाव-निष्ठ हो
इसके कारण एवं कुछ उद्देश्य :-
यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि हिन्दी भाषा, जो भारत की एक प्रमुख और व्यापक रूप से समझी जाने वाली भाषा है, उसमें क़ुरआन मजीद के सटीक, शुद्ध, संतुलित तथा भाव-निष्ठ अनुवाद अपेक्षाकृत बहुत कम उपलब्ध हैं। जो हिन्दी अनुवाद उपलब्ध हैं, उनमें से अधिकांश या तो उर्दू अनुवाद का देवनागरी लिप्यंतरण मात्र हैं, या उर्दू-शैली से अत्यधिक प्रभावित हैं, अथवा केवल शब्दानुवाद तक सीमित हैं, जिसके कारण क़ुरआन के वास्तविक आशय, भाव-क्रम और संदर्भ की समग्र समझ हिन्दी पाठकों तक स्पष्ट रूप से नहीं पहुँच पाती। इस स्थिति में हिन्दी भाषी पाठक या तो क़ुरआन के संदेश से दूरी बना लेते हैं, या फिर किसी अन्य भाषा के अनुवाद के पुनः अनुवादन पर निर्भर होने को विवश हो जाते हैं, जहाँ अनुवाद की एक और परत जुड़ जाने से मूल अर्थ की सटीकता और स्पष्टता और भी कम हो जाती है।
इसके अतिरिक्त, वर्तमान समय में फैलती हुई भ्रमपूर्ण धारणाएँ, एकांगी प्रस्तुतियाँ और इस्लामोफोबिया का प्रभाव हिन्दी भाषी समाज पर विशेष रूप से देखा जा सकता है। अनेक हिन्दी भाषी लोग क़ुरआन के विषय में अपनी राय प्रत्यक्ष अध्ययन के आधार पर नहीं, बल्कि सुनी-सुनाई बातों, अपूर्ण उद्धरणों या पक्षपाती व्याख्याओं के आधार पर बना लेते हैं। इससे यह भ्रांति उत्पन्न हो जाती है कि क़ुरआन में मानवीय मूल्यों, नैतिक शिक्षा या सकारात्मक संदेश का अभाव है। ऐसी स्थिति में, यदि कोई पाठक क़ुरआन को समझने का प्रयास भी करता है, तो प्रायः उसे या तो - अत्यधिक कठिन भाषा में लिखा अनुवाद मिलता है, या ऐसा सरलीकरण, जो मूल संदेश की गंभीरता और संतुलन को ही बदल देता है, या ऊर्दू शैली से प्रभावित / उर्दू अनुवाद का लिप्यंतरण ।
इस परियोजना का उद्देश्य इन दोनों अतियों से बचते हुए क़ुरआन मजीद के संदेश को शुद्ध, सटीक, सरल तथा संदर्भ-संगत हिन्दी भाषा में प्रस्तुत करना है, ताकि हिन्दी भाषी पाठक स्वयं क़ुरआन के कथन को उसके अपने संदर्भ और भाव-क्रम में समझ सकें।
आशा है कि यह प्रयास हिन्दी भाषी पाठकों के लिए क़ुरआन को समझने का एक विश्वसनीय, संतुलित और शुद्ध माध्यम सिद्ध होगा। और भ्रमपूर्ण धारणाएँ , इस्लाम विरोधी पक्षों के धोखे में आकर भटकने वाले हिंदी भाषी लोगों के लिए सत्य का मार्ग बनेगा। -- [ InshaAllah ]
कोष्ठक ( ) का उद्देश्य :--
क़ुरआन की भाषा अत्यंत सटीक और अर्थ-गहन है। एक ही अरबी शब्द या वाक्यांश में कई भाव, संकेत और संदर्भ निहित हो सकते हैं, जिन्हें कई बार किसी अन्य भाषा में पूर्णतः समान रूप में स्थानांतरित करना संभव नहीं होता। इसी कारण, इस अनुवाद में कोष्ठक ( Bracket ) का प्रयोग एक स्पष्टीकरण-साधन के रूप में किया गया है।
कोष्ठक में दिए गए शब्द या वाक्यांश— मूल अरबी पाठ का शाब्दिक भाग नहीं हैं,बल्कि पाठक की समझ में सहायता के लिए जोड़े गए व्याख्यात्मक संकेत, व्याकरण के संदर्भ तत्व, सरल शब्द, संक्षिप्त संदर्भ हैं। उद्देश्य क़ुरआन के भाव को सरलता , सटीकता से स्पष्ट करना है, न कि उसमें कोई नया अर्थ जोड़ना।
ब्रैकेट का प्रयोग किन परिस्थितियों में किया गया है :
- जहाँ हिन्दी में वाक्य पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त व्याख्यात्मक व्याकरण ; शब्द आवश्यक हों, जबकि अरबी में वही बात संक्षेप में व्यक्त हो जाती है।
- जहाँ किसी सर्वनाम, संकेत या क्रिया का संदर्भ स्पष्ट करना आवश्यक हो, ताकि अर्थ में भ्रम न उत्पन्न हो।
- जहाँ किसी शब्द का भावार्थ एक से अधिक संभावनाएँ रखता हो, और पाठक को मूल अर्थ के निकट पहुँचाने के लिए संक्षिप्त संकेत देना उपयुक्त हो।
- जहाँ अनुवाद को अत्यधिक कठिन या अत्यधिक सरल होने से बचाना आवश्यक हो।
- जहां शाब्दिक अर्थ के सीधे अनुवाद की बजाए उस शब्द का भावार्थ बताना उपयुक्त हो।
प्रकाशन विवरण :-
THE NOBLE QUR'AN
सटीक, सरल एवं संदर्भ - सहित अर्थपरक भावार्थ ( हिन्दी अनुवाद )
भाषा : हिन्दी , स्रोत पाठ : क़ुरआन मजीद ( अरबी )
अनुवाद एवं भावार्थ प्रस्तुति संयोजन एवं प्रारूपण
[ MD. TASHARIF HUSSAIN ] [ MD. TASHARIF HUSSAIN ]
यह हिन्दी अनुवाद क़ुरआन मजीद के शब्दार्थ, भाव-अर्थ और संदर्भ को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित , शुद्ध, सरल एवं ईमानदार मानवीय प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
