العلق
Al-'Alaq (रक्त का थक्का)
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
[ आरंभ ( शुरू ) ] अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, निरंतर ( असीम ) दयाशील है ।
اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ
पढ़ो ! अपने रब ( पालनहार ) के नाम से, जिसने सृजन ( रचना ) किया ।
خَلَقَ الْإِنسَانَ مِنْ عَلَقٍ
सृजन किया मनुष्य का जमे हुए खून ( चिपके रक्त / लोथड़े ) से ।
اقْرَأْ وَرَبُّكَ الْأَكْرَمُ
पढ़ो !! और तुम्हारा रब अत्यंत उदार है ;
الَّذِي عَلَّمَ بِالْقَلَمِ
जिसने कलम के द्वारा ( ज्ञान ) सिखाया ।
عَلَّمَ الْإِنسَانَ مَا لَمْ يَعْلَمْ
सिखाया इंसान को जो वह नहीं जानता था ।
كَلَّا إِنَّ الْإِنسَانَ لَيَطْغَىٰ
{ तो वो आभारी होता, किन्तु } कदापि नहीं ! [ बल्कि ] निःसंदेह इंसान सीमा उल्लंघन ( अति अवज्ञा ) करता है ;
أَن رَّآهُ اسْتَغْنَىٰ
कि वह स्वयं को समृद्ध ( आत्मनिर्भर ) देखता है !
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ الرُّجْعَىٰ
निश्चय ही [ सबकी ] तुम्हारे रब की ओर ही वापसी है ।
أَرَأَيْتَ الَّذِي يَنْهَىٰ
भला देखो तो ! ( उसे ) जो मना करता ( रोकता ) है ,
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰ
एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है ।
أَرَأَيْتَ إِن كَانَ عَلَى الْهُدَىٰ
भला देखो तो ! यदि वह मार्गदर्शन पर हो ,
أَوْ أَمَرَ بِالتَّقْوَىٰ
या वह धर्मनिष्ठता ( अल्लाह से डरने ) का आदेश देता हो ।
أَرَأَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ
भला देखो तो ! यदि उसने झुठलाया ( नकारा ) और ( सत्य से ) मुंह मोड़ लिया !
أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ اللَّهَ يَرَىٰ
क्या वह नहीं जानता ? कि निःसंदेह अल्लाह देख रहा है ।
كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًا بِالنَّاصِيَةِ
{ फिर सावधान ! } कदापि नहीं ! यदि निश्चय ही वह विरत ना हुआ , तो हम अवश्य घसीटेंगे ( उसके ) ललाट ( पेशानी ) के बाल ;
نَاصِيَةٍ كَاذِبَةٍ خَاطِئَةٍ
वह ललाट ( जो ) झूठा , अपराधी ( पापी ) है।
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُ
तो फिर वह बुला ले ! अपनी सभा ( साथियों ) को ,
سَنَدْعُ الزَّبَانِيَةَ
हम ( भी ) बुला लेंगे, कठोर सिपाहियों ( नर्क के निर्दयी फरिश्तों ) को !
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَاسْجُدْ وَاقْتَرِب ۩
कदापि नहीं ! उसका कहना ना मानो और सजदा करो और [ अपने रब के ] समीप हो जाओ । ۩ [ आयत 19 के बाद सजदा करना वाजिब ( आवश्यक ) है । ۩ ]
