البينة

Al-Bayyinah (स्पष्ट प्रमाण)

कुल आयतें: 8
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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

[ आरंभ ( शुरू ) ] अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, निरंतर ( असीम ) दयाशील है ।

1

لَمْ يَكُنِ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ مُنفَكِّينَ حَتَّىٰ تَأْتِيَهُمُ الْبَيِّنَةُ

जिन लोगों ने कुफ्र ( अस्वीकार ) किया - पुस्तक वालों ( यहूदी तथा ईसाई ) और बहुदेववादियों ( साझी ठहराने वालों ) में से ; वे विरत होने वाले नहीं थे , यहां तक कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ जाए ।

2

رَسُولٌ مِّنَ اللَّهِ يَتْلُو صُحُفًا مُّطَهَّرَةً

[ अर्थात ] अल्लाह की ओर से एक संदेशवाहक ( रसूल ) , जो पवित्र पृष्ठों का पाठ करता है !

3

فِيهَا كُتُبٌ قَيِّمَةٌ

जिसमें बिल्कुल सीधे ( सदृढ़ ) लेख हैं !

4

وَمَا تَفَرَّقَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ إِلَّا مِن بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَةُ

और विभक्त नहीं हुए वे लोग, जिन्हें पुस्तक दी गई थी ; सिवाय इसके बाद कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ गया।

5

وَمَا أُمِرُوا إِلَّا لِيَعْبُدُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ حُنَفَاءَ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ ۚ وَذَٰلِكَ دِينُ الْقَيِّمَةِ

और उन्हें ( कोई और ) आदेश नहीं दिया गया था , सिवाय इसके कि वे एकाग्र होकर , उसी ( अल्लाह ) के लिए धर्म को एकनिष्ठ ( शुद्ध ) करते हुए अल्लाह की उपासना करें , और नमाज़ स्थापित करें और ज़कात ( पवित्र दान ) निर्वाहित करें और यही सुदृढ़ ( सीधा ) धर्म है।

6

إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ أُولَـٰئِكَ هُمْ شَرُّ الْبَرِيَّةِ

निःसंदेह जिन लोगों ने कुफ्र ( अस्वीकार ) किया - पुस्तक वालों और बहुदेववादियों में से , वे जहन्नम ( नरक ) की आग में होंगे { और } वे उसमें सदैव रहेंगे ; यही लोग हैं सबसे बुरी सृष्टि !

7

إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَـٰئِكَ هُمْ خَيْرُ الْبَرِيَّةِ

निःसंदेह जो लोग ईमान लाए ( विश्वास किया ) और सत्कर्म किए ; यही लोग हैं सर्वश्रेष्ठ सृष्टि !

8

جَزَاؤُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَشِيَ رَبَّهُ

उनका प्रतिफल उनके रब के पास सदैव रहने के बाग ( जन्नत ) है, जिनके नीचे से नदियां बहती हैं ; वे उसमें सदैव रहेंगे अनंत काल तक ! अल्लाह उनसे प्रसन्न हुआ और वे उससे प्रसन्न हुए ; यह ( प्रतिफल ) उसके लिए है जो अपने रब से डरा ।