القارعة

Al-Qari'ah (खड़खड़ाने वाली ( भीषण आघात ))

कुल आयतें: 11
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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

[ आरंभ ( शुरू ) ] अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, निरंतर ( असीम ) दयाशील है ।

1

الْقَارِعَةُ

खड़खड़ाने वाली ! ( भीषण आघात )

2

مَا الْقَارِعَةُ

क्या है? ( वह ) खड़खड़ाने वाली ! ( भीषण आघात )

3

وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْقَارِعَةُ

और तुम्हें क्या पता, क्या है ? ( वह ) खड़खड़ाने वाली! ( भीषण आघात )

4

يَوْمَ يَكُونُ النَّاسُ كَالْفَرَاشِ الْمَبْثُوثِ

जिस दिन लोग बिखरे हुए पतंगे जैसे हो जाएंगे।

5

وَتَكُونُ الْجِبَالُ كَالْعِهْنِ الْمَنفُوشِ

और पर्वत ( पहाड़ ) धुनी हुई रंगीन ऊन के समान ( जैसे ) हो जाएंगे।

6

فَأَمَّا مَن ثَقُلَتْ مَوَازِينُهُ

तो बहरहाल ( वह ) जिसके पलड़े ( नेकी / सत्कर्म के तौल ) भारी होंगे।

7

فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ

तो वह मनभाते ( आनंदमय ) जीवन में होगा।

8

وَأَمَّا مَنْ خَفَّتْ مَوَازِينُهُ

और रहा वह जिसके पलड़े ( नेकी / सत्कर्म के तौल ) हल्के होंगे।

9

فَأُمُّهُ هَاوِيَةٌ

तो उसकी माँ ( अंततः वास्तविक ठिकाना ) 'हाविया' होगी।

10

وَمَا أَدْرَاكَ مَا هِيَهْ

और तुम्हें क्या पता, क्या है ? वह ! (हाविया)

11

نَارٌ حَامِيَةٌ

दहकती हुई ( अत्यंत तप्त ) आग !