الشرح

Ash-Sharh (विस्तृत ( खोल देना ))

कुल आयतें: 8
मक्का में अवतरित की गई
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بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

[ आरंभ ( शुरू ) ] अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, निरंतर ( असीम ) दयाशील है ।

1

أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ

[ हे नबी ﷺ ] क्या हमने तुम्हारे लिए तुम्हारा सीना ( छाती ) नहीं खोल दिया ?

2

وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ

और हमने तुम पर से तुम्हारा बोझ उतार दिया ;

3

الَّذِي أَنقَضَ ظَهْرَكَ

जिसने तुम्हारी पीठ तोड़ ( चटका ) दी थी !

4

وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ

और हमने तुम्हारे लिए तुम्हारी चर्चा उच्च ( ऊंची ) कर दी !

5

فَإِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا

अतः निश्चय ही कठिनाई के साथ सरलता है।

6

إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا

निःसंदेह कठिनाई के साथ सरलता है।

7

فَإِذَا فَرَغْتَ فَانصَبْ

तो जब तुम निवृत्त ( कार्य - मुक्त ) हो जाओ तो [ बंदगी में ] परिश्रम करो।

8

وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَارْغَب

और अपने रब ( पालनहार ) की ओर उन्मुख ( मन से एकाग्र ) हो जाओ।