الشرح
Ash-Sharh (विस्तृत ( खोल देना ))
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ
[ आरंभ ( शुरू ) ] अल्लाह के नाम से जो अत्यंत दयावान, निरंतर ( असीम ) दयाशील है ।
أَلَمْ نَشْرَحْ لَكَ صَدْرَكَ
[ हे नबी ﷺ ] क्या हमने तुम्हारे लिए तुम्हारा सीना ( छाती ) नहीं खोल दिया ?
وَوَضَعْنَا عَنكَ وِزْرَكَ
और हमने तुम पर से तुम्हारा बोझ उतार दिया ;
الَّذِي أَنقَضَ ظَهْرَكَ
जिसने तुम्हारी पीठ तोड़ ( चटका ) दी थी !
وَرَفَعْنَا لَكَ ذِكْرَكَ
और हमने तुम्हारे लिए तुम्हारी चर्चा उच्च ( ऊंची ) कर दी !
فَإِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا
अतः निश्चय ही कठिनाई के साथ सरलता है।
إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا
निःसंदेह कठिनाई के साथ सरलता है।
فَإِذَا فَرَغْتَ فَانصَبْ
तो जब तुम निवृत्त ( कार्य - मुक्त ) हो जाओ तो [ बंदगी में ] परिश्रम करो।
وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَارْغَب
और अपने रब ( पालनहार ) की ओर उन्मुख ( मन से एकाग्र ) हो जाओ।
